बेरुखी करूँ या करूँ प्यार, इनकार करूँ या करूँ इजहार।। देखकर तुझे रहा नही जाता, और तुमसे कुछ कहा नही जाता।। तस्वीर तुम्हारी देखकर चूम लेती हूँ, सोचकर तुम्हें मस्त हवाओं में, मैं झूम लेती हूँ।। ओर कर लेती हूँ कुछ प्यार भरी बातें, दिन तो कट जाते है पर कटती नही रातें।। चाँद तारों से तेरी बातें किया करती हूं, उनसे ही कह देती हूँ, मैं तुमपे मरती हूँ।। चाँद ने मुझसे कई बार कहा,, कह तो दो इक बार उनसे, करो प्यार का इज़हार उनसे।। गले से लगा वो लेंगे, अपना तुम्हें बना लेंगे।। वो भी तो होंगे इनतजार में इज़हार के, क्यों तुम रखती हो दूरियाँ प्यार में।। दिल धड़कता है मेरा कैसे इज़हार करूँ, आँखें भी तरसती हैं कैसे उनका दीदार करूँ।। कहीं वो बुरा न मान जाएं, मुझे छोड़कर न चले जाएं।। छोड़ गर वो गए मुझे,मैं जी न पाऊँगी।। बुलाकर उन्हें उनकी बाहों में मर जाऊँगी।। किस्सा खत्म होगा इनकार ओर इज़हार का, इंतज़ार खत्म हो जाएगा मेरे प्यार का।। मुस्कान शर्मा।।