तेरा चेहरा देखकर जो सुकून होता है
मेरे चेहरे पर इक अलग ही नूर होता है।।
आईना भी अब मुझसे झूठ बोलता है
मेरे चेहरे की जगह तेरा चेहरा होता है।।
रात में जब देखती हूँ आसमां को
चाँद में भी तेरा ही नूर होता है।।
सोचती हूँ मैं जब भी तेरे बारे में
मुझे खुद पर गुरुर होता है।।
सोचकर तुझे, जो एहसास मुझे होता है
ऐसा लगता है तू मेरे पास होता है।।
सिमट जाती हूँ मैं खुद की ही बाहों में
दूरियों का न कुछ एहसास होता है।।
मुस्कान शर्मा।।