तुम आए,
कुछ क्षण ठेहरे,
और चले गए...
सब वीरान छोड़ कर,
तुम साथ सुकून, नींद और मुझे ले गए,
और छोड़ गए तो क्या?
एक सवाल, एक चुप्पी...
तुम भूल गए थे,
जहां तुम पर्यटक बन के आए थे,
वह महज़ एक कमरा नहीं था।


तुम आए,
कुछ क्षण ठेहरे,
और चले गए...
सब वीरान छोड़ कर,
तुम साथ सुकून, नींद और मुझे ले गए,
और छोड़ गए तो क्या?
एक सवाल, एक चुप्पी...
तुम भूल गए थे,
जहां तुम पर्यटक बन के आए थे,
वह महज़ एक कमरा नहीं था।