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कुछ एसा


वो पतझड़ के उस खाली पेड़ के अकेले पत्ते सा है..मैं बेहती हवा सी उसे छू के गुज़र तो पाती हूँ,परंतु उसके साथ उड़ नहीं पाती...

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