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कैसे बनता होगा कोई शायर बुझे ज़रा

मैं तो सीधी साधी बाते किया करता था पर ख़ामोशी के बोझ तले बातो मैं कुछ सलवटे पढ़ गयी है और लोग कहते है जनाब शायर हो गए कुछ कोमल ख्याल मर गए कुछ कोयले से कीमती हो गए कुछ बाते करीब आ गयी , और हामला* हो गयी , नए नन्हे मानी उग आये उन पे | ख़ामोशी के खोल तले बड़ी धमा चौकड़ी मचाते है मासी मासी कहते ख़ामोशी को
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