वो रात अमावस की थी,
ना चाँद था ना चांदनी,
अब कौन गवाही देगा मेरी कौन सच बताएगा?
बस मैं और मेरा कातिल थे
मुझे इंसाफ कौन दिलाएगा?


वो रात अमावस की थी,
ना चाँद था ना चांदनी,
अब कौन गवाही देगा मेरी कौन सच बताएगा?
बस मैं और मेरा कातिल थे
मुझे इंसाफ कौन दिलाएगा?