किसी की कोख से निकली तो किसी को कोख में रखा माँ हूँ , बहन हूँ ,पत्नी हूँ सब कुछ मैं ही तो हूँ ! किसी ना किसी गलियारे के सन्नाटे मेरी चीख से टूटते रहते हैं हर रोज हर वक़्त हर पल हर घड़ी खुले आसमान के तले घूमना तो दूर साँस लेना भी दुभर है मेरा ना जाने किस कोने पे भूखे भेड़िये मुझे नोंचने के लिए बैठे हों इज्जत ना दो तो बेइज्जत ना करो खुद की नजरों में खुद को लज्जित ना करो मेरे बिना ना वंश तुम्हारा मेरे बिना ना हस्ती तुम्हारी मुझको दो सम्मान मैं सजाऊँ बगिया तुम्हारी नारी हूँ मैं !!