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जीवन


किस्तों में आमदनी है किस्तों में चुकानी है माटी का सोना है यहां एक जर्जर कटही गाड़ी है उम्मीदों के रस्ते चढ़ते -उतरतेचंद साँसों की गाड़ी में चंद साँसो की सवारी है घर उतरने से पहले सबको एक-एक पाई चुकानी है यह जीवन मालगुजारी है।

— दीपक यात्री
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