ढाँचा कैसा है ?

सुविधा से युक्त अथवा

असुविधा से तर

वातानुकूलित या सामान्य

आरक्षित या अनारक्षित

बैठें हैं सिकुड़े या सोये हैं फैलकर

इज़्ज़त है अथवा हिकारत

किन्तु ,

है जो असल बात

जो रखती है मायने

जिसका तुक भी है अर्थ भी

जिसके बाद सब हैं गौण

जहाँ कोई भेदभाव नहीं

जो आधार है सबका

जो बराबर देता है उठा-पटक

हर झुकाव सबके लिए

हर उठाव सबके लिए

चला जाता है बाँधे

सभी को एक साथ

वह पहिया , जो गोल है...

क्या फर्क पड़ता है....