अजब सी उलफ़त,रूसवाई,इबादत है वो
मेरी चाहत, आदत,ख्वाईश सब कुछ है वो
अब मैं उसके सिवा शायद कुछ नहीं
मेरी जिस्म,जान,जहाँन सब है वो
मैं अब कही इबादत को नहीं जाता हूँ
मेरी मंदिर,मस्जिद,गुरूद्वारा है वो
मैं अब कभी उसके बिना रह नहीं पाता हूँ
मेरी सूबह,शाम,रात,भोर हर पहर है वो
मैं अब उसके बिना कुछ लिख नहीं पाता हूँ
मेरी हिन्दी,उर्दू,भोजपुरी हर कलम है वो