एक बिहारी सौ पर भारी
 साबित किया उसने हर बारी
 जालिम सरकार के सामने
उसने कभी हार नहीं मानी 

 80 की उम्र में भी उस सपूत का
 मनोबल देखो कितना भारी 
 स्वाभिमान की मिसाल लिए
 निकल गया वह मिलो दूर 

जब सामना अंग्रेजी सत्ता से हुआ
अपराजिता का उनका भ्रम कर दिया चकनाचूर
एक बिहारी सौ पर भारी
साबित किया उसने हर बारी

अपने शरीर का अंग काट कर
 गंगा मां को  किया अर्पण
 लेकिन नहीं झुकने दिया
मां भारती को दिया हुआ प्रण

कुछ तो बात है
बिहार की मिट्टी में
कभी दिया बुध सा ज्ञानी  
कभी दिया वीर कुंवर सिंह स्वाभिमानी

एक बिहारी सौ पर भारी
साबित किया उसने हर बारी
वीर कुंवर सिंह जी को शत शत नमन

दीपक (बेख्याली)