मैंने उसको अनुरक्ति से पुकारा
फिर भी उसने पलट कर
नहीं देखा दोबारा
उसके अल्हड़पन की कहानी
जैसे सरिता का बहता पानी
मेरा हृदय का अनुराग
नहीं रोक पाया उसकी रवानी
स्वभाव में नहीं ठहरना उसका
कभी मैं भी था साहिल उसका
मेरे हृदय की चाहत ने
वैसे कोशिश की थी पुरजोर
लेकिन उसकी जिद थी
जैसे जिला बिजनौर
कर गई वह किनारा
इस किनारे से भी
मैंने उसको फिर भी
अनुरक्ति से पुकारा...
वह एक सरिता - सी थी
जिसने ठहराव नहीं स्वीकारा..
दीपक (बेख्याली)

