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प्रेमिका


तू मेरी दोस्त ही ठीक थीकहां तू प्रेम की अंधकार गलियों में पैर रख बैठीदोस्ती के सरल रास्ते को छोड़करक्यों तू आंसुओं के सैलाब पर सवार हो बैठीकहां तू मेरी प्रेमिका बन बैठी

दीपक (बेख्याली)

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