इस दीपावली मैं चाहती हूँ 
मेरी दीपावली तुम्हारे साथ हो
तुमसे एक साधारण सी मुलाकात को 
अमावस्या के अंधकार में
दीपों का आलोक हो
गंगा के घाट पर बेख्याली 
तुम्हारा ही ख्याल हो 
मैं चाहती हूँ तुमसे
एक साधारण सी मुलाकात को 
मेरी दीपावली तुम्हारे साथ हो
हमारी उंगलियां आपस
में करें ढेर सारी बातें
हवा का बहाना कर 
मेरी जुल्फे चाहे तुम से लिपट जाने को
मेरा तुम पर विश्वास कर दे
विवश तुम्हारे कांधे पर सिर झुकाने को
इस दीपावली मैं चाहती हूँ 
तुमसे एक साधारण सी मुलाकात को
मेरी दीपावली तुम्हारे साथ हो
दरमियां पसरा रहे सन्नाटा
और कोई ना हमारे आस-पास हो....

दीपक (बेख्याली)