आत्मा कभी अपवित्र हो नहीं सकती
देह कभी अमर हो नहीं सकती..
इतनी भी क्या मजबूरियां
जो दिल में इतनी खामोशियां
तेरा गुस्सा, तेरी नाराजगी जायज है
यदि प्रेम तुमने भी किया है
मेरे प्रेम पथ की मंजिल तेरे लबों तक नहीं थी
यह सफर जारी रहेगा
प्यार था, है और रहेगा!
दीपक (बेख्याली)

