कैसे त्यौहार का उत्सव मनाऊं
बिना बाप के दीप जलाऊं
मेरे घर का प्रकाश था वह
अमावस्या के अंधकार में
मेरी मां का चांद था वह
जो चला गया मेरी हिम्मत
मेरा साहस था वह
मेरा बाप था वह
कैसे त्यौहार का उत्सव मनाऊं
बिना बाप के दीप जलाऊं
मां को मैं उसका साहस
उसका सहारा दिखता हूं
मां से कैसे बोलूं
मैं भी अंदर से बेसहारा हूं
भगवान ना करे किसी
बच्चे के जीवन में
यह दिन आए
बिना बाप के वह दीप जलाए
दीपक (बेख्याली)

