अबकी सर्दी में यह भी चाह पूरी हो जाए 


तेरे साथ एक प्लेट मैगी और चाय हो जाए


सुबह की गुनगुनी धूप में 


कुछ पल हम साथ में बिताए 


जब हम गरम गरम नूडल्स को कांटे से उठाएंगे


तब हमारे होंठ एक दूसरे के लिए


फूंक मारने के लिए मजबूर हो जाएंगे


बैठे-बैठे एक दूसरे के और करीब हो जाएंगे


जब कुछ पल हम साथ में बिताएंगे


अबकी सर्दी में यह भी चाह पूरी हो जाए 


तेरे साथ एक प्लेट मैगी और चाय हो जाए



सुबह की धूप में, जिंदगी गुलाब सी खिल जाए 



एक दूसरे के लिए हम खुशबू से बन जाए.....


दीपक (बेख्याली)