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काशी


हे अविनाशीनयन है,तुम्हारे दर्शन के प्यासीइससे पहले कि हो प्राण पखेरूएक बार तो बुला लो काशीबाबा मैं तो हूं कमियों से भराकई जन्मो तक विरह में तपापकड़ लो मेरा हाथ अविनाशीअब तो मुझको बुला लो काशी

दीपक ( बेख्याली)

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