इश्क में इतनी शिद्दत कहां से लाऊंजो तू मोम सी पिंगलेऔर मैं कागज सा गल जाऊंतुम बोलती हो बदल रहा हूं मैंदेख धीरे-धीरे खत्म हो रहा हूं मैंदीपक (बेख्याली)
इश्क में इतनी शिद्दत कहां से लाऊं
जो तू मोम सी पिंगले
और मैं कागज सा गल जाऊं
तुम बोलती हो बदल रहा हूं मैं
देख धीरे-धीरे खत्म हो रहा हूं मैं
दीपक (बेख्याली)