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दीवानी


लिखती हूं, मिटाती हूँ

अपनी शिकायतों को

दुनिया से छुपाती हूँ

आंसुओं का सागर

कभी सूखता नहीं

वजह आंसुओं की

मुझसे कभी पूछता नहीं

क्या मैं इतनी बेगानी हूँ

श्याम मैं तो

तेरे नाम की दीवानी हूँ ...

दीपक (बेख्याली)

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