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बरसात


आज फिर से उसने पूरी रात बरसात होते देखी!आज फिर उसने सारी मेहनत बर्बाद होते देखीकभी प्रकृति से, तो कभी भूख से लड़तासमय के चक्कर में हमेशा वो ही पिसता

दीपक (बेख्याली)

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