कौन जाने कब तलक जीवन में सवेरा है 

ना तेरा है, ना मेरा है 

ये जो दुनियादारी का मेला है

केवल बारह मण लकड़ी का झमेला है

मैंने अच्छी-अच्छी लकड़ीयों को खूब धूप में सुखाया है 

जब जीवन में सारी चीजों को अपनी पसंद का पाया है 

ये जो दुनियादारी का मेला है

केवल बारह मण लकड़ी का झमेला है

ताकि सुखी लकड़ीयां अच्छे से जले  

और उठते धुएं से किसी का दम ना घुटे

और ना हीं किसी की आंखें जले 

ये जो दुनियादारी का मेला है

केवल बारह मण लकड़ी का झमेला है

अब क्या देखना है, कौन मेरा कौन पराया है 

आंखों का पानी बता देगा कौन किसका कितना है

ये जो दुनियादारी का मेला है

केवल बारह मण लकड़ी का झमेला है

दीपक (बेख्याली)