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प्रेम


प्रेम गुलाबों की ख़ुशबू नहीं,दशरथ मांझी का हथौड़ा है,कर्ण का दान है,शबरी का इंतज़ार है,मीरा का विरह है।

जो इन्हें समझ ले,उसे प्रेम समझाने की ज़रूरत नहीं रहती।

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