उसकी रज़ा
ये तो लकीरें ले आई यहां
वरना हमें कहां मंजूर था
ना कर भी दे क्या फर्क पड़ता है
उसने सोचा कुछ ज़रूर होगा
रास्ते में खारा समंदर दिया तो क्या
मंजिल पर मीठे पानी का चश्मा भी ज़रूर होगा
मैं तो डूब ही चुका था लगभग
उसने मुझे बचाया है
उसने सोचा कुछ जरूर होगा
उसकी रज़ा है ये तो
उसने लिखा कुछ लकीरों में जरूर होगा
दीपक

