मौसम ने करवट खाई
हवाऐं फिर झूम के आई
चमकी बिजली एक दम से जब
देखो बारिश आई
देखो बारिश आई

धरा की जो तपन थी
वो बदल गई नमी में
फिर से तर हो गई खेतों की मिट्टी
जो सुखी थी पानी की कमी से
हरी हो गई पेड़ों की पत्तियां
जो थी मुरझाई हुई
देखो बारिश आई
देखो बारिश आई

हर गली फैलाई खुशबू इसने
हर तरफ रौनक लाई
चिटियां चल पड़ी बोरिया बिस्तर समेट
पंछियों को भी घोंसलों की याद आई
देखो बारिश आई
देखो बारिश आई

  दीपक