बचपन में उनके साथ खेलते हैं, बड़े होते ही, आदर और अनुशासन हमें दूर कर देते हैं


जब हम दूर पढाई करने जाते हैं; मां कहती है- ठीक से रहना , पढाई करना, समय-समय पर खाना खा लेना

पर पिता सिर्फ इतना ही कह पाता है- बेटा अकाउंट में पैसे डाल दिए हैं और जरूरत पडे तो बता देना


पिता सिर्फ ATM मशीन ही नहीं होता, वह एक मजबूत ढाल भी होता है


जिंदगी भर ढूंढते रह जाते हैं उस सुकून को, जो बचपन में पिता की छांव में हमें मिला था


~ दीपक चौधरी