मुझे तेरी पलको की छांव में रहने दो
कुछ बातें जो अनकही सी है ,उसे कहने दो
उँगलियाँ जो तेरे जुल्फों में रुकी सी है
थोड़ी शरारतें इन्हें भी करने दो
हम तुम एक दूसरे में घुल कर सो जाएं
रात की चाँद को यूँही खुद में जलने दो
तेरे तसव्वुर में ही सारे पल बीत जाये मेरे
कुछ ऐसी गुस्ताखियां की इजाजत रहने दो
- दीपक ठाकुर ✍️ ♥️


