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सोच का सागर


सोच के सागर में, गोते लगा रहा हूँ फिलहाललौट आने में शायद, देरी हो सकती है मुझेअगर जो तुम मिलना चाहो, निजी बेचैनियों मेंतो आ जाना ... इसी सोच के सागर मेंतब तक तुम्हारा वही , इंतज़ार करूँगा मैं ।

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