ये जो रातों को जज्बात यूं बेक़ाबू हो जाते है
चाह भर लू , तो भी किसी और के नही हो पाते है ।
अब तो अश्क़ों ने भी नैनों का साथ छोड़ दिया है
खैर , तेरे बिना फिर एक नई सुबह आती है ,
फिर दुनिया की इस भीड़ में बेमकसद खो जाते है ।


ये जो रातों को जज्बात यूं बेक़ाबू हो जाते है
चाह भर लू , तो भी किसी और के नही हो पाते है ।
अब तो अश्क़ों ने भी नैनों का साथ छोड़ दिया है
खैर , तेरे बिना फिर एक नई सुबह आती है ,
फिर दुनिया की इस भीड़ में बेमकसद खो जाते है ।