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फिर एक दफा


तुझसे फुरसत क्या मिली, जैसे खुद को पा चुका हूँ ।इल्म तो होगा तुझे भी, की तुझसे कितनी दूर जा चुका हूँ ।।

जिन्दगी से मोहब्बत सी होने लगी है, फिर एक दफा ।फिर एक दफा जीने को कुछ नए ख्वाब सजा चुका हूँ ।।

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