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इल्तेज़ा


मेरे बाहों की इल्तेजा हैं, तेरे बाहों में आने की,दरमियां हमारे रंजिशो को अगर तुम खत्म कर देते

फिर एक दफा अपनी ज़िंदगी मे लौट आता मैंमेरे इंकिसार इल्तेज़ा को, अगर तुम मुकम्मल कर देते ।

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