ज़र्रे ज़र्रे में तेरा ही नूर है,
शायद इसलिए तू बहुत मशहूर है।
तुझे पाने की खातिर पूजा,अर्चना और इबादत भी की,
पर ना जाने तुझे खुद पे क्यूं इतना गुरूर है।
मुझ से ना सही उस खुदा से तो डर,
क्या तुझे चाहना यही मेरा कसूर है।
सजा देनी ही है तो मुझे दे दे,
ये दिल ए एहसास तो बेचारा बेकसूर है।
तेरे तस्सवुर में गुजरी सारें पल याद है मुझे,
तुझ पे जान देने वाले को भी , कभी तू अपनी जान कहे,इतनी आस तो मुझे जरूर है।
।।। ज़र्रे ज़र्रे में तेरा ही नूर है ।।।