Poetry 1 min read 778K reads

बेरहम


ऐ बेरहम,अब रहम की उम्मीद न कर मुझसे।तूने उसका भी क़त्ल कर डाला बेरहमी से।।

— दीपक गिरी'अनुपम'
Read more Earn more Learn more