Poetry 1 min read 492.4K reads

पंद्रह अगस्त


औरत प्रधान है मगर वो घर में कैद हैं,कैसी मिली है आज़ादी पंद्रह अगस्त को।

तिरंगा सोचे कोई कुचले फाड़े ना कल मुझे,चिंता करे वो सोलह कि पंद्रह अगस्त को।

— DEEPAKMSTBAJI
Read more Earn more Learn more