औरत प्रधान है मगर वो घर में कैद हैं,कैसी मिली है आज़ादी पंद्रह अगस्त को।तिरंगा सोचे कोई कुचले फाड़े ना कल मुझे,चिंता करे वो सोलह कि पंद्रह अगस्त को।
औरत प्रधान है मगर वो घर में कैद हैं,कैसी मिली है आज़ादी पंद्रह अगस्त को।
तिरंगा सोचे कोई कुचले फाड़े ना कल मुझे,चिंता करे वो सोलह कि पंद्रह अगस्त को।