सब जन में घुल जाती हैं बसती हैं माँ नर्मदा,तेरा पानी आँचल हैं और गोदी हैं माँ नर्मदा।माँ गंगा निकली हैं भोले कि जटाओं से औरचट्टानों का हाथ पकड़कर उतरी हैं माँ नर्मदा,
सब जन में घुल जाती हैं बसती हैं माँ नर्मदा,तेरा पानी आँचल हैं और गोदी हैं माँ नर्मदा।
माँ गंगा निकली हैं भोले कि जटाओं से औरचट्टानों का हाथ पकड़कर उतरी हैं माँ नर्मदा,