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हिन्दी


न किसी काश न आस न आशा में बोले,न हिम्मत कोई हारे न निराशा में बोले।

शब्द हैं पुष्प, पुष्प की भाषा में बोले,जब भी कोई बोले तो मातृभाष में बोले।

— DEEPAK MSTBAJI
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