वह इंद्रियों का शासक था,

किंतु इंद्र न था।

वह वैष्णव तो था,

किंतु विष्णु न था।

ब्रह्मचर्य का गुण था,

किंतु ब्रह्मा न था।

रौद्र रूप धारण किया,

किंतु वह शिव न था।

सैलाब आंखों से बरसने को था,

किंतु वह एक मेघ न था।

भावनाओं में बहता था,

किंतु पवन न था।

अनेकों विचार समेटे थे अपने अंदर,

किंतु समंदर न था।

मानवता की कमी थी,

किंतु फिर भी वह एक मानव था,

वह एक मानव था।