हर पल की हर निगाह को है,
अब तेरी ही है चाहत
आई हो तुम पास मेरे,ऐसा लगता है,
जब भी होती है कोई आहट।
छूकर निकलती है जब, आती है तेरी खुशबू,
इन मस्त हवाओं से,
ढूंढ नहीं पाती है निगाहें, खो जाती हो तुम,
फिर से इन फिजाओं में।
बेकरार-ए-दिल को चैन आता नहीं,
हर नजर को है तेरा ही इंतजार,
न जाने कहां हो तुम,
आओ और कर लो स्वीकार मेरा प्यार।
रहमों करम करो इतना,मत सताओ दिल को
आकर गले से लग जाओ
बस आखरी गुजारिश है मेरी अब,
जान जाने से पहले जान तुम चली आओ।


