बेबस बाँहें लिए
फिरता रहता हे
वो आवारा अब उसे
दिल में लिए फिरता रहता हे
सामने आकर ख़डी भी हो जाए वो
तो कोई कमाल नहीं
वो अब अपने जिस्म में
उसकी रूह को लेकर फिरता रहता हे
-दीप श्रीमाल


बेबस बाँहें लिए
फिरता रहता हे
वो आवारा अब उसे
दिल में लिए फिरता रहता हे
सामने आकर ख़डी भी हो जाए वो
तो कोई कमाल नहीं
वो अब अपने जिस्म में
उसकी रूह को लेकर फिरता रहता हे
-दीप श्रीमाल