कोई खबर भी सुन ले या फिर इश्तेहार देख
सब झूठ का ग़ुबार है तू जितनी बार देख
बर्बादियों में लुत्फ़ बहुत आएगा तुझे
इस दिल को करके तू भी कभी बेक़रार देख
दुनिया बहुत हसीन है गुमान था तुझे
बर्बाद कर रहा हूँ अये परवरदिगार देख
हर सिम्त देखता हूँ तुझे आँख मूंदकर
तूभी तो कभी मेरी तरफ एक बार देख
अब आईने भी झूठ की तस्वीर हो गए
सच्चाई देखनी है तो फिर आर पार देख
“दानिश” बस उससे मिलके ज़रा हाल पूछ ले
हिम्मत अगर है ,उसको कभी अश्क़बार देख