आने को है मुसीबत, तुम इंतज़ार करना
पहले से हो सके तो, थोड़ा विचार करना
क्या खुशनुमा थी पहले दुनिया की ये हवाएं
मालिक ने हमको दी थी ,कितनी हसीं फ़िज़ाएं
चारो तरफ की रौनक करती हैं अब दुआएं
रो रो के वादियां भी देती हैं ये सदायें
जब लुट चुके चमन तो ज़िक्रे बहार करना
पहले से हो सके तो, थोड़ा विचार करना
तुम शाम को भी देखो तुम दोपहर भी देखो
कैसी धुआं धुआं है अपनी सहर भी देखो
नज़दीक आने वाला है जो क़हर भी देखो
घुलता है जो हवा में तुम वो ज़हर भी देखो
थोड़ा सा अपने दिल को अब बेक़रार करना
पहले से हो सके तो, थोड़ा विचार करना
तप्ती ज़मी से बादल के साये छठ रहे हैं
खैरात में ही बारिश के दान बट रहे हैं
ये सूखती नदी है जंगल भी कट रहे हैं
और वापसी के सारे इमकान घट रहे हैं
बच जाए अपना गुलशन कोशिश हज़ार करना
पहले से हो सके तो, थोड़ा विचार करना
अब कर चुकी तरक्की लाचारियों का आदी
किसने किया है सबको ख़ुदग़र्ज़ियो का आदी
ये कर न डालें हमको बर्बादियों का आदी
कड़वी हवा करेगी बीमारियों का आदी
जब देर हो चुके तो क्या होशियार करना
पहले से हो सके तो, थोड़ा विचार करना
आने को है मुसीबत, तुम इंतज़ार करना पहले से हो सके तो, थोड़ा विचार करना

