
रख कर शिफ़ा तू ईद के माहे मुबीन में।
या रब सुक़ून भेज दे सारी ज़मीन में।
रोज़ो में ख़ाक ग़फ़लतो हिर्सो अना हुए।
कितने ही बुत छुपे थे मेरी आस्तीन में।
मेरी दुआ भी होगी तवाफ़े दरे रहीम।
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रख कर शिफ़ा तू ईद के माहे मुबीन में।
या रब सुक़ून भेज दे सारी ज़मीन में।
रोज़ो में ख़ाक ग़फ़लतो हिर्सो अना हुए।
कितने ही बुत छुपे थे मेरी आस्तीन में।
मेरी दुआ भी होगी तवाफ़े दरे रहीम।