रख कर शिफ़ा तू ईद के माहे मुबीन में।

या रब सुक़ून भेज दे सारी ज़मीन में।

रोज़ो में ख़ाक ग़फ़लतो हिर्सो अना हुए।

कितने ही बुत छुपे थे मेरी आस्तीन में।

मेरी दुआ भी होगी तवाफ़े दरे रहीम।

हर एक दुआ की क़द्र है दारुल अमीन में।

सजदों में इतना रोऊँ के अर्शे बरीं हिले।

दिल की तड़प को डाल दे मेरी जबीन में।

'दानिश' वो अपनीं रहमतें बरसाएगा ज़रूर।

मुझको यक़ीन होने लगा है यक़ीन में।