महल तामीर करता जा रहा है खिलाना था जिसे वो खा रहा है वो जिसने हाथ जोड़े थे यहाँ पर वो अब आँखें हमें दिखला रहा है सितारे उसके रोशन हो रहे हैं मेरे घर के दिए बुझवा रहा है हकीकत तल्ख़ होती जा रही है सुहाने ख्वाब वो दिखला रहा है समझता है बुलंदी छू रहा है वो उल्टा और गिरता जा रहा है फलक से फैसला उतरेगा 'दानिश' अभी वो जीत पे इतरा रहा है