है यही हाल की रेहमत की दुहाई दूंगा हाय क्या हश्र में उस रब को सफाई दूंगा है ये तौहीने मोहब्बत तुझे रुस्वा देखूं उसने पुछा  भी तो मैं कैसे गवाही दूंगा मेरे अलफ़ाज़ ही सुनता है वो एहसास नहीं है यही बात तो मैं कैसे सुनाई दूंगा उसने बोला है मेरे इश्क़ में मजज़ूब बनो आँख मूंदोगे तो हर सिम्त दिखाई दूंगा एक तहज़ीब की दौलत मेरे बच्चो का नसीब वो संवर जाएंगे मैं ऐसी कमाई दूंगा मैं अगर खेल भी खेलूंगा तो मयार के साथ तुम अगर जीत गए तुमको बधाई दूंगा