बहुत मिलना मिलाना हो रहा है
हम ही से सब बहाना हो रहा है
तुम्हारा दर्द लिखता जा रहा हूँ
मोहब्बत का फ़साना हो रहा है
ग़ज़ल बातें तुम्हारी कर रही है
मेरा क़ायल ज़माना हो रहा है
तुम्हे अहदे वफ़ा का पास कब था
इधर से तो निभाना हो रहा है
नहीं हो तुम मगर फिर भी तुम ही को
बिना रूठे मानना हो रहा है
सही जाकर लगे हैं तीर सारे
अजब तेरा निशाना हो रहा है
ये दिल बच्चो सा ज़िद पे आ चुका बस
तेरे कूचे से जाना हो रहा है
तेरी फुरक़त भी ‘दानिश’ क्या हुनर है
ग़ज़ल का कारखाना हो रहा है

