दर्द ग़ज़लों में मत सुनाओ उसे।
ज़ख्म खोलो जिगर दिखाओ उसे।
फिर नए शेर कह रहे हो मियाँ।
तुमसे बोला था भूल जाओ उसे।
उसको महशर का ख़ौफ दिलवाओ।
ख़्वाब में जाओ और डराओ उसे।
इश्क़ में इन्तेक़ाम चाहते हो।
यूँ करो खूब याद आओ उसे।
अब भी जिंदा हूँ और मज़े में हूँ।
कोई जाकर ज़रा बताओ उसे।