हिम्मत कहती है की हिम्मत हारो ना।

तूफाँ में भी कश्ती कभी उतारो ना।


बाहर के रावण को मारा ठीक किया।

अपने अंदर का भी रावण मारो ना।


कितना अँधियारा है अंदर देखो तो

अपने अंदर कोई रात गुज़ारो ना।


असली चेहरा क्या था खुद ही भूल गए ?

चेहरे से चेहरे को ज़रा उतारो ना।


आँखे खोलके कुछ भी नज़र नहीं आता।

आँखे मूँदके मुझको कभी पुकारो ना।


जैसे अपनी ज़ुल्फ़ सँवारी है तुमने।

मेरी भी तो दुनिया ज़रा संवारो ना।