गणतंत्र हमारा अधूरा है
फुटपाथों पर लोग हैं
कुछ होश में कुछ बेहोश
किसी के हिस्से छत है
कुछ अब भी हैं खानाबदोश
भूखे बच्चे रो रहे
मातम की है काली छाया
अँधेरी परछाइयों में
तांडव करता मौत का साया
रोटी के लिए जब तक बिकने की मजबूरी है
गणतंत्र हमारा अधूरा है , आज़ादी हमारी अधूरी है
ओ सरकारी दफ्तरों के बाबू
क्या तुमको लाज आती है
गरीबों की कितनी ही उम्मीदें
फाइलों में कुचली जाती हैं
योजनाओं की मंडी में
कितनो का ईमान बिक जाता है
गरीब सिसकियाँ भरता है
अफसर मन में मुस्काता है
इस सिस्टम से अब एक आखरी जंग जरूरी है
गणतंत्र हमारा अधूरा है , आज़ादी हमारी अधूरी है
हिंसा है बेरोजगारी है
आतंकवाद तलवार दोधारी है
लड़का हो या लड़की हो
सबको आज़ादी प्यारी है
पर सपने सच होने अभी बाकी हैं
पता नहीं कौन सी रंजिश है
औरतों पर हर बात की
कोई न कोई बंदिश है
जब तक उनको बराबरी का हक न दें
शपथ लोकतंत्र की नहीं पूरी है
गणतंत्र हमारा अधूरा है , आज़ादी हमारी अधूरी है
भ्रस्टाचार है जातिवाद है
जेहादी नारों का शमा है
खून के प्यासे लोगों में
मानवता अब बची कहाँ है
जो पाया वो खो न जाये
इसका तो जरा ध्यान करो
बहकावे में न आओ लोगो
बलिदानों का सम्मान करो
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
क्यों दिलों में अब भी दूरी है
गणतंत्र हमारा अधूरा है , आज़ादी हमारी अधूरी है
पर एक दिन ऐसा जरूर आएगा
जब दिलों के मैल धुल जायेंगे
हम सब जन गण मिलकर
सपनों सा देश बनाएंगे
कर्मो के पहियों पर
सवार होगी जवानी
रोके से फिर न रुकेगी
विकास की गति तूफानी
टुकड़ो मे बटे भारत को
फिर से अखंड बनाएंगे
और उल्लास के साथ
गणतंत्र दिवस मनायेंगे स्वतंत्रता दिवस मनायेंगे/