जब कहो तो संक्षेप सुनो तो विशाल समझो तो अवकाश तोलो तो अर्थ तोड़ो तो अनर्थ जोड़ो तो आकाश विषम में पास सम में दूर हम में आस संग में प्रास्त स्थिर तो आनंद अस्थिर तो अवसान विश्वास हीआह्वान सम्मान ही प्राण रक्त या मन मानो तो राम हॉं संजीवनी संबंध की ©️®️ दामिनी नारायण सिंह
