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रामजन्मोत्सव


श्याम वरण पुलकित मनन शोभित प्रभुजी अंगना

हार निहार बसे जब चरणन प्रगट धरा भयो रमना

जग शोभित रुंधे हाँ नयन हृदय मनोरथ वंदना

सकल समाधि जग गये जैसे

सकल समाधि

जग गये जैसे

प्रभु उतरे जब अंगना

प्रभु उतरे जब अंगना

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