श्याम वरण पुलकित मनन शोभित प्रभुजी अंगनाहार निहार बसे जब चरणन प्रगट धरा भयो रमनाजग शोभित रुंधे हाँ नयन हृदय मनोरथ वंदनासकल समाधि जग गये जैसेसकल समाधिजग गये जैसेप्रभु उतरे जब अंगनाप्रभु उतरे जब अंगना©️?
श्याम वरण पुलकित मनन शोभित प्रभुजी अंगना
हार निहार बसे जब चरणन प्रगट धरा भयो रमना
जग शोभित रुंधे हाँ नयन हृदय मनोरथ वंदना
सकल समाधि जग गये जैसे
सकल समाधि
जग गये जैसे
प्रभु उतरे जब अंगना
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